भगवान कार्तिकेय (स्कंद, मुरुगन) आरती-भजन (1 घंटे के भजन के लिए मुख्य मुखड़ा और कई अंतरे) मुखड़ा (बार-बार गाने के लिए): जय-जय कार्तिक स्वामी, जय-जय षण्मुख दयाल। मोर सवारी, शक्ति धारी, कर दो जीवन खुशहाल॥ शिव-शक्ति के प्यारे नंदन, देवों के तुम रखवाले। भक्तों के संकट हरते, भर दो सुख के उजियाले॥ अंतरा 1…
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