सच्चे ब्रह्मचर्य से ही चरित्र में पवित्रता, बुद्धि में प्रखरता और चेहरे पर वास्तविक तेज आता है; यह केवल शारीरिक नियंत्रण नहीं बल्कि मन की सर्वोच्च अवस्था है।