ब्रह्मचारी वह नहीं है जो केवल संसार से दूर रहता है, बल्कि वह है जो अपनी ऊर्जा, मन और विचारों को वश में करके उन्हें आत्म-कल्याण और राष्ट्र-निर्माण में लगा देता है।