"जब तक तुम्हारी आँखें सिर्फ बाहर की दुनिया को देखती हैं, तब तक तुम केवल भ्रम में जीते हो; जिस दिन ये आँखें बंद होकर भीतर देखना शुरू कर देंगी, उसी क्षण अध्यात्म का जन्म होगा।"