"परमात्मा से आपका मिलन तब तक संभव नहीं है, जब तक आपके भीतर 'मैं' और 'मेरा' का भाव जीवित है। जैसे ही अहंकार का पतन होता है, वैसे ही आत्मा की सच्ची उड़ान शुरू होती है।"