"क्षणिक सुख बनाम अनंत शांति"संसार के क्षणिक और शारीरिक सुखों से ऊपर उठकर अपनी चेतना को ऊपर उठाना ही ब्रह्मचर्य है, यही मन को परम शांति और बुद्धिमत्ता की ओर ले जाता है।