"संकल्प की अग्नि और ओज का तेज"ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले व्यक्ति के मुख पर एक अनोखा ओज (तेज) होता है, क्योंकि उसकी आंतरिक शक्ति व्यर्थ बहने के बजाय उसके संकल्प को मजबूत करती है