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pravin thanki

कल्पना कीजिए, समुद्र के ऊपर तूफान से पहले की वह भारी खामोशी, जो *किसी बड़ी उथल-पुथल का संकेत दे रही हो। जब दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रधान 24 घंटे में दो बार 'संयम' की गुहार लगाए, तो समझ लीजिए कि बात सिर्फ तेल की चंद बूंदों की नहीं है।* *_यह उस 'आर्थिक महायुद्ध' की तैयारी है जिसकी धमक अभी आम …

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