ऊर्जा का रूपांतरण: "ब्रह्मचर्य का अर्थ ऊर्जा को दबाना नहीं, बल्कि उसे शरीर के निचले स्तरों से उठाकर ऊर्ध्वगामी (ऊपर की ओर) ले जाना है ताकि वह ओजस और मेधा शक्ति बन सके।"