पवित्रता की शक्ति: "विचार, वचन और कर्म में हर स्थिति में पवित्रता बनाए रखना ही असली ब्रह्मचर्य है।" - स्वामी विवेकानंद के अनुसार, यह मानसिक शक्ति का मुख्य स्रोत है