Snivogram

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जब व्यक्ति यह समझ लेता है कि वह इस विशाल ब्रह्मांड का एक छोटा सा अंश मात्र है, तब उसका अहंकार पिघलने लगता है। जिस क्षण 'मैं' मिट जाता है, उस खाली स्थान में दिव्यता का प्रवेश होता है। आध्यात्मिक रूप से 'शून्य' होने का अर्थ रिक्त होना नहीं, बल्कि 'पूर्ण' होना है। जब हम अपनी सीमाओं को छोड़ देते हैं, तभ…

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