सच्चा अध्यात्म मूर्ति की पूजा से पहले, अपने भीतर के 'अहंकार' को विसर्जित करना है। जब हमारे मन के विचारों का शोर कम होता है, तब वह 'मौन' पैदा होता है जिसमें ईश्वर की आवाज़ सुनाई देती है। याद रखें, परमात्मा बाहर किसी गुफा में नहीं, बल्कि आपके शांत चित्त के दर्पण में विराजमान है। जिस दिन आप दूसरों को …
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