गुजरी रात का अंधेरा अब पुराना हो गया,उठो मुसाफिर, मंज़िल का बहाना हो गया।जो खोया उसे भूल जाओ आज के लिए,एक नया दिन है, फिर से मुस्कुराना हो गया।