दुनिया वैसी नहीं दिखती जैसी वो 'है', बल्कि वैसी दिखती है जैसे 'हम' हैं। अपनी बाहरी दुनिया बदलने से पहले अपनी आंतरिक सोच की खिड़की को साफ करना जरूरी है।