Snivogram

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जब तक "मैं" है, तब तक "वह" (परमात्मा) नहीं है। जब हम यह समझ जाते हैं कि हम इस ब्रह्मांड का एक छोटा सा हिस्सा हैं, न कि इसके केंद्र, तब अहंकार पिघलने लगता है और प्रेम का जन्म होता है।

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