असली सुख न धन में है, न प्रसिद्धि में—वह हमारे मन की स्थिरता में है। जब हम कुछ पल खुद के साथ बिताते हैं, अपने विचारों को देखते हैं, तब हमें समझ आता है कि हमारी बेचैनी का कारण बाहर नहीं, अंदर है। ध्यान, प्रार्थना और सकारात्मक सोच के माध्यम से हम अपने मन को शांत कर सकते हैं
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