आध्यात्मिक जीवन का मतलब दुनिया से भागना नहीं, बल्कि उसमें रहते हुए भी संतुलन बनाए रखना है। जब इंसान अपने कर्मों को निस्वार्थ भाव से करता है, तब उसका मन हल्का और शांत रहता है