ईश्वर को पाने के लिए बड़े अनुष्ठान नहीं, बल्कि सच्चे भाव की जरूरत होती है। जब इंसान अपने अहंकार को छोड़कर सरलता से जीने लगता है, तब हर क्षण में उसे दिव्यता का अनुभव होने लगता है।