हम अक्सर बाहरी शोर में इतने उलझ जाते हैं कि अपनी ही अंतरात्मा की आवाज़ सुनना भूल जाते हैं। आध्यात्मिक जीवन का पहला कदम यही है कि हम थोड़ी देर रुकें और अपने भीतर झांकें।