ब्रह्मचर्य का अर्थ केवल इंद्रियों को दबाना नहीं, बल्कि अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाना है। आज का युवा अक्सर अपनी शक्ति को क्षणिक सुखों में खो देता है, जबकि यही ऊर्जा उसे महान बना सकती है।