ब्रह्मचर्य में वह शक्ति है जो आम इंशान को खास बना देती है स्वामी विवेकानंद ने 12 वर्ष तक अखंड ब्रह्मचर्य रहे तो एक अलग ही पहचान छोड़ के गये