कोहरा या कुहासा कोहरा कहो या फिर कुहासा — जब बहुत ज़्यादा हो जाए तो शीतलहरी ही कह लो। थोड़ा बूँद से ठोस की ओर बढ़ चले तो पाला कहते थे हम। पाला पड़ना कितना आम था लोकोक्तियों में — शायद पहाड़ों की बर्फ़बारी के सापेक्ष। मगर इस धुएँ-नुमा ठंड के मौसम में हम बच्चों का सबसे बड़ा कौतूहल होता था — मुँह से न…
View this post in the app Get Snivogram on Google Play