जो धरा का भार कंधो पर उठा ये बांट दे जग को न अमृत बूंद अधरो पार लगायी है जरूरी आज ऐसे देवता की विश्व को फिर विश्व का विस सिंधु पी जाए मगर हिचकी ना आए