Snivogram

Upendra

आज सुबह मेरे नींद खुलने के पहले से ही यहाँ बारिश हो रही है। खिड़की से झांका तो देखा कि पानी के मोतियों के झुंड हरे-हरे पेड़ के पत्तों से ऐसे लिपट रहें थे... जैसे मैं बचपन मे जब भी उदास होता था तो अपने दादी से लिपट जाता था वैसे मैं अपने सारे अतीत को बारिश के वक़्त ही खुदेरता हूँ। ☔

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